विलयन का अर्थ
जब दो अथवा दो से अधिक पदार्थ आपस में मिलकर ऐसा मिश्रण बनाते हैं जिसमें सब कुछ समान रूप से मिला हुआ प्रतीत हो और जिसे आँखों से अलग-अलग नहीं किया जा सके, तो उस मिश्रण को विलयन कहा जाता है।
विलयन के दो भाग माने जाते हैं —
जिस पदार्थ की मात्रा कम होती है वह विलेय कहलाता है और जिस पदार्थ में वह घुलता है तथा जिसकी मात्रा अधिक होती है, वह विलायक कहलाता है।
जैसे — पानी में घुला नमक एक विलयन है।
विलयनों की अवस्थाएँ
विलयन गैस, द्रव और ठोस — तीनों अवस्थाओं में बन सकते हैं।
उदाहरण के रूप में
वायु गैसों का विलयन है,
सोडा द्रव में गैस का विलयन है,
पानी में शराब द्रवों का विलयन है,
नमक का पानी द्रव में ठोस का विलयन है,
मिश्रधातुएँ जैसे पीतल ठोस अवस्था के विलयन हैं।
सांद्रता का अर्थ
विलयन में विलेय की कितनी मात्रा उपस्थित है, इसे ही सांद्रता कहा जाता है।
यह विभिन्न रूपों में व्यक्त की जाती है, परंतु यहाँ सभी को केवल अर्थ के रूप में समझना पर्याप्त है।
द्रव्यमान प्रतिशत
जब विलेय के द्रव्यमान की तुलना संपूर्ण विलयन के द्रव्यमान से की जाती है, तब इसे द्रव्यमान प्रतिशत कहते हैं।
आयतन प्रतिशत
जब विलेय के आयतन की तुलना संपूर्ण विलयन के आयतन से की जाती है, तब इसे आयतन प्रतिशत कहते हैं।
मोल अंश
जब किसी घटक की मात्रा को संपूर्ण मिश्रण की कुल मात्रा से अनुपात के रूप में व्यक्त किया जाता है, उसे मोल अंश कहते हैं।
मोलरता और मोललता
मोलरता विलयन के निश्चित आयतन पर आधारित होती है और मोललता विलायक के निश्चित द्रव्यमान पर आधारित होती है।
मोललता तापमान पर निर्भर नहीं करती क्योंकि द्रव्यमान तापमान से नहीं बदलता, जबकि मोलरता बदल सकती है।
घुलनशीलता
किसी निश्चित तापमान पर किसी निश्चित मात्रा के विलायक में अधिकतम जितनी मात्रा में विलेय घुल सकता है, उसी को घुलनशीलता कहते हैं।
घुलनशीलता तीन बातों पर निर्भर करती है —
विलेय की प्रकृति
विलायक की प्रकृति
तापमान और दाब
गैसों की घुलनशीलता दाब बढ़ने पर बढ़ जाती है।
इसी कारण ठंडे पेयों में गैस अधिक मात्रा में घुली रहती है।
वाष्प दाब
हर द्रव की सतह पर कुछ अणु निकलकर वाष्प बन जाते हैं।
इन वाष्पों द्वारा डाला गया दाब वाष्प दाब कहलाता है।
जब किसी द्रव में एक अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है, तो द्रव का वाष्प दाब घट जाता है।
इस सिद्धांत को समझाने के लिए राउल्ट का नियम बताया जाता है।
विलयनों के सामूहिक गुण
वे गुण जो विलेय कणों की संख्या पर निर्भर करते हैं, परंतु उनकी प्रकृति पर निर्भर नहीं होते, सामूहिक गुण कहलाते हैं।
इनमें प्रमुख गुण निम्न प्रकार के हैं:
वाष्प दाब में कमी
विलेय के मिलने से विलायक का वाष्प दाब घट जाता है।
उबालांक में वृद्धि
चूँकि वाष्प दाब घट जाता है, इसलिए द्रव को उबलने के लिए अधिक ताप की आवश्यकता होती है और उसका उबलने का ताप बढ़ जाता है।
हिमांक में अवनमन
विलेय के मिलने से द्रव का जमने का ताप कम हो जाता है।
इसका उपयोग बर्फ पिघलाने में किया जाता है।
परासरण
जब अर्धपारगम्य झिल्ली के दोनों ओर भिन्न सांद्रता वाले विलयन रखे जाते हैं, तो विलायक कम सांद्र विलयन से अधिक सांद्र विलयन की ओर प्रवाहित होता है।
इस प्रवाह को रोकने के लिए जिस दाब की आवश्यकता होती है, उसे परासारी दाब कहते हैं।
परासरण जीवित प्राणियों की कोशिकाओं के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है।
आदर्श और अनादर्श विलयन
आदर्श विलयन
वे विलयन जिनमें विलेय तथा विलायक के कणों के बीच आकर्षण बल प्राकृतिक रूप से लगभग समान होते हैं और जिनके बनने पर न तो ऊष्मा निकलती है न अवशोषित होती है, उन्हें आदर्श विलयन कहते हैं।
अनादर्श विलयन
वे विलयन जिनके बनने पर ऊष्मा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है, तथा आयतन में परिवर्तन हो सकता है, उन्हें अनादर्श विलयन कहा जाता है।
अज़ियोट्रोप
कुछ विलयन निश्चित अनुपात में इस प्रकार उबलते हैं कि उन्हें साधारण आसवन द्वारा अलग नहीं किया जा सकता।
ऐसे विशेष विलयनों को अज़ियोट्रोप कहा जाता है।
उदाहरण के रूप में शराब और पानी का मिश्रण।
सामूहिक गुणों में असामान्यताएँ
कुछ विलेय पानी में घुलकर आयन बना लेते हैं या आपस में मिलकर नए समूह बना लेते हैं।
इस कारण सामूहिक गुणों के मान अपेक्षित मानों से भिन्न हो जाते हैं।
ऐसी स्थिति में सुधार के लिए विशेष गुणांक का प्रयोग किया जाता है।
दैनिक जीवन में विलयन का महत्व
- चिकित्सा में परासरण का उपयोग
- खारे घोल द्वारा निर्जलीकरण से बचाव
- सॉफ्ट ड्रिंक में गैस का घुलना
- बर्फ पिघलाने में नमक का प्रयोग
- भोजन संरक्षण
- औषधियों का निर्माण
मुख्य सारांश
- विलयन समांगी मिश्रण होता है
- विलेय कम मात्रा वाला और विलायक अधिक मात्रा वाला पदार्थ होता है
- घुलनशीलता तापमान और दाब से प्रभावित होती है
- विलेय कणों की संख्या सामूहिक गुणों को प्रभावित करती है
- आदर्श विलयनों में ऊष्मा परिवर्तन नहीं होता
- परासरण जीवित कोशिकाओं के लिए अनिवार्य है
संतृप्त, असंतृप्त और अतिसंतृप्त विलयन
असंतृप्त विलयन
जब विलायक में अभी और विलेय घुल सकता हो, तब ऐसा विलयन असंतृप्त कहलाता है।
जैसे यदि पानी में नमक घोला जाए और वह पूरा घुल जाए तथा और नमक भी घुल सके, तो वह असंतृप्त है।
संतृप्त विलयन
जब किसी निश्चित तापमान पर विलायक में और विलेय नहीं घुल पाता, तब वह संतृप्त विलयन कहलाता है।
उस अवस्था में विलायक अपनी अधिकतम घुलन क्षमता तक पहुँच चुका होता है।
अतिसंतृप्त विलयन
जब किसी संतृप्त विलयन को धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है और फिर भी अतिरिक्त विलेय घुला रहता है, तो वह अतिसंतृप्त कहलाता है।
यह अवस्था अस्थिर होती है और हल्की-सी हलचल पर अतिरिक्त विलेय पुनः अलग हो सकता है।
घुलनशीलता को प्रभावित करने वाले कारक
विलेय और विलायक की प्रकृति
एक समान प्रकृति वाले पदार्थ एक-दूसरे में अधिक घुलते हैं।
जैसे ध्रुवीय पदार्थ ध्रुवीय विलायक में अधिक घुलते हैं।
तापमान
अधिकांश ठोस पदार्थों की घुलनशीलता तापमान बढ़ने पर बढ़ जाती है।
जबकि गैसों की घुलनशीलता तापमान बढ़ने पर घट जाती है।
दाब
गैसों की घुलनशीलता दाब बढ़ाने पर बढ़ती है।
इसी कारण सोडा बोतलों को अधिक दाब पर बंद किया जाता है।
राउल्ट के नियम का भावार्थ
यदि किसी अवाष्पशील विलेय को शुद्ध विलायक में घोला जाए तो विलायक का वाष्प दाब कम हो जाता है।
इस नियम का अर्थ यह है कि जितना अधिक विलेय होगा, उतना ही कम वाष्प दाब होगा।
यह सिद्धांत सामूहिक गुणों की नींव है।
हेनरी के नियम का सरल अर्थ
जब किसी गैस को किसी द्रव में घोला जाता है तो दाब बढ़ाने पर गैस अधिक घुलती है।
यही कारण है कि कार्बोनेटेड पेयों में कार्बन डाइऑक्साइड गैस अधिक दाब पर भरी जाती है ताकि वह घुली रहे।
परासरण, हाइपरटॉनिक, हाइपोटॉनिक और समसांद्र विलयन
परासरण का अर्थ
यदि दो भिन्न सांद्रता वाले विलयन एक अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा अलग-अलग रखे जाएँ, तो विलायक का प्रवाह कम सांद्र विलयन से अधिक सांद्र विलयन की ओर होता है।
हाइपोटॉनिक विलयन
जिस विलयन की सांद्रता कम हो, वह हाइपोटॉनिक कहलाता है।
हाइपरटॉनिक विलयन
जिस विलयन की सांद्रता अधिक हो, वह हाइपरटॉनिक कहलाता है।
समसांद्र विलयन
जब दोनों विलयनों की सांद्रता समान हो, तब वे समसांद्र कहलाते हैं और परासरण रुक जाता है।
जीवित कोशिकाओं में जल का आवागमन इसी कारण होता है।
विलयन से सम्बन्धित कुछ सामान्य शब्द
विलेयीकरण
घुलने की पूरी प्रक्रिया विलेयीकरण कहलाती है।
विलेयता सीमा
वह अधिकतम मात्रा जो किसी विलायक में घुल सकती है, विलेयता सीमा कहलाती है।
समांगी मिश्रण
जहाँ सब कुछ समान रूप से मिला हो और कोई भेद न दिखे, ऐसा मिश्रण समांगी कहलाता है — यही विलयन होता है।
विषमांगी मिश्रण
जहाँ घटक अलग-अलग दिखाई दें, वह विषमांगी होता है — यह विलयन नहीं होता।
विलयन के अध्ययन का महत्त्व
चिकित्सा विज्ञान में दवाइयाँ प्रायः विलयन के रूप में दी जाती हैं।
रक्त में घुले खनिज पदार्थ हमारे शरीर के लिए आवश्यक होते हैं।
कृषि में उर्वरकों का घोल पौधों द्वारा आसानी से ग्रहण किया जाता है।
उद्योगों में कई पदार्थों को शुद्ध करने के लिए विलयन सिद्धांतों का प्रयोग किया जाता है।
खाद्य संरक्षण में नमक और चीनी के घोल अत्यन्त सहायक होते हैं।
प्रयोगशाला में विलयन बनाते समय सावधानियाँ
विलेय और विलायक शुद्ध होने चाहिए।
विलायक को पहले लिया जाना चाहिए और उसके बाद विलेय घुलाना चाहिए।
यदि द्रव विलयन बनाया जा रहा हो तो अच्छी तरह मिलाना चाहिए ताकि विलयन समान रूप से बन सके।
खतरनाक रसायनों को हमेशा सुरक्षित ढंग से संभालना चाहिए।
विलयन से जुड़े जीवन के उदाहरण
- पानी में शर्करा का घोल
- खारा जल
- चाय और कॉफी
- समुद्री जल
- रक्त में घुले पोषक तत्व
- वातावरण में घुली गैसें
ये सभी हमारे दैनिक जीवन में विलयन की उपस्थिति दर्शाते हैं।
Meaning of a Solution
Saturated, Unsaturated and Supersaturated Solutions
Unsaturated Solution
When a solvent can still dissolve more solute, the solution is called an unsaturated solution.
For example, if salt is dissolved in water and it completely dissolves — and more salt can still dissolve — then the solution is unsaturated.
Saturated Solution
When, at a fixed temperature, no more solute can dissolve in a solvent, the solution is called a saturated solution.
In this condition, the solvent has reached its maximum dissolving capacity.
Supersaturated Solution
When a saturated solution is slowly cooled and still contains more solute than its normal capacity, it is called a supersaturated solution.
This state is unstable and even a light disturbance can cause the extra solute to separate out again.
Factors Affecting Solubility
Nature of Solute and Solvent
Substances of similar nature dissolve more easily in each other.
For example, polar substances dissolve better in polar solvents.
Temperature
For most solid substances, solubility increases with increase in temperature.
For gases, solubility decreases when temperature increases.
Pressure
The solubility of gases increases when pressure increases.
That is why soda bottles are sealed under high pressure.
Meaning of Raoult’s Law
When a non-volatile solute is dissolved in a pure solvent, the vapour pressure of the solvent decreases.
This means that the more solute you add, the more the vapour pressure falls.
This principle is the foundation of colligative properties.
Simple Meaning of Henry’s Law
When a gas is dissolved in a liquid, increasing the pressure makes more gas dissolve.
This is why carbon dioxide gas is filled into soft drinks at high pressure so that it remains dissolved.
Osmosis, Hypertonic, Hypotonic and Isotonic Solutions
Meaning of Osmosis
If two solutions of different concentrations are separated by a semipermeable membrane, the solvent flows from the dilute solution to the concentrated solution.
Hypotonic Solution
A solution having lower concentration is called a hypotonic solution.
Hypertonic Solution
A solution having higher concentration is called a hypertonic solution.
Isotonic Solution
When both solutions have the same concentration, they are called isotonic solutions and osmosis stops.
Movement of water in living cells happens because of osmosis.
Some Common Terms Related to Solutions
Dissolution
The complete process of dissolving a solute in a solvent is called dissolution.
Solubility Limit
The maximum amount of solute that can dissolve in a solvent is called the solubility limit.
Homogeneous Mixture
When all components are uniformly mixed and no difference can be seen, the mixture is called homogeneous — this is what a solution is.
Heterogeneous Mixture
When components can be seen separately, the mixture is heterogeneous — it is not a solution.
Importance of Studying Solutions
- Medicines are mostly given in the form of solutions.
- Minerals dissolved in blood are essential for our body.
- In agriculture, fertilizer solutions are easily absorbed by plants.
- In industries, solution principles are used to purify many substances.
- Salt and sugar solutions are very useful in food preservation.
Precautions While Preparing Solutions in the Laboratory
The solute and solvent should be pure.
The solvent should be taken first and then the solute should be added to it.
If a liquid solution is being prepared, it should be mixed well so that it becomes uniform.
Dangerous chemicals should always be handled safely.
Examples of Solutions in Daily Life
- Sugar solution in water
- Salt water
- Tea and coffee
- Sea water
- Nutrients dissolved in blood
- Gases dissolved in the atmosphere
All these show the presence of solutions in our daily life.
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